सतलुज नदी के जलस्तर और सिल्ट की समस्या पर बड़ा कदम—सोनार तकनीक से होगा सर्वेक्षण

Shimla,4 December-:सुन्नी क्षेत्र में हाल के वर्षों में सतलुज नदी के जलस्तर में तेजी से हो रही वृद्धि और सिल्ट जमा होने की चुनौती को देखते हुए उपायुक्त अनुपम कश्यप ने गुरुवार को सुन्नी में विस्तृत बैठक की।उपायुक्त ने बताया कि कोलडैम प्रबंधन द्वारा इस क्षेत्र में सिल्ट की वास्तविक स्थिति जानने के लिए उन्नत सोनार तकनीक से सर्वेक्षण करवाया जा रहा है।यह सर्वेक्षण कार्य 15 दिसंबर 2025 से शुरू होगा और अगले 15 से 20 दिनों के भीतर पूरा होने की संभावना है।इसके बाद प्रबंधन द्वारा विस्तृत रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी,जिसके आधार पर सुन्नी क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक सुरक्षा और प्रबंधन रणनीति तैयार की जाएगी।

उपायुक्त ने कहा कि बढ़ते जलस्तर से स्थानीय लोगों की जमीनें और आवासीय क्षेत्र खतरे में आ रहे हैं। इस वर्ष आईटीआई परिसर,विश्राम गृह सुन्नी,गोसदन और आसपास के कई रिहायशी क्षेत्रों में जलभराव और गाद की समस्या गंभीर रूप से सामने आई थी।उपायुक्त ने इन सभी स्थानों का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता लोगों की जान और संपत्ति की सुरक्षा है।

थली पुल की क्षति का हवाला देते हुए उपायुक्त ने बताया कि इसके मरम्मत के लिए 10 करोड़ रुपये स्वीकृत हो चुके हैं। इस महीने कार्य शुरू होकर आगामी मानसून से पहले पूरा कर लिया जाएगा।मरम्मत के दौरान मौजूदा पुल से तीन मीटर ऊंचाई पर सस्पेंशन तकनीक से नया पुल भी तैयार किया जाएगा,ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में आवागमन प्रभावित न हो।पुल की क्षति के कारण मंडी–शिमला मार्ग बाधित है,जिससे लोगों को भारी असुविधा झेलनी पड़ रही है। इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी।बैठक में एडीएम प्रोटोकॉल ज्योति राणा,एसडीएम राजेश वर्मा, एनटीपीसी अधिकारी और अन्य हितधारकों ने भाग लिया।

सोनार सर्वेक्षण क्यों है महत्वपूर्ण?

सोनार तकनीक ध्वनि तरंगों की सहायता से पानी के भीतर वस्तुओं और संरचनाओं का मानचित्रण करती है। कम दृश्यता की स्थितियों में यह तकनीक बेहद प्रभावी है और जलाशयों, पुलों व नदी तल की वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन देती है।

आईआईटी रुड़की की रिपोर्ट

आईआईटी रुड़की द्वारा 2014 से 2024 तक किए गए अध्ययन में पाया गया कि 2021 के बाद सतलुज नदी में सिल्ट तेजी से बढ़ी है।तत्तापानी,सुन्नी और चाबा में सिल्ट क्षेत्रफल कई गुना बढ़ा है।रिपोर्ट के अनुसार सुन्नी क्षेत्र की सिल्ट निर्माण कार्यों के लिए उपयुक्त है और नियंत्रित तरीके से माइनिंग करने से जलस्तर कम किया जा सकता है। एनटीपीसी ने इसके लिए एनओसी देने की सहमति जताई है।

बढ़ा आर्थिक नुकसान

रिपोर्ट अनुसार कोल डैम के निर्माण के बाद नदी तल में परिवर्तन से 2018-19 से अब तक करोड़ों का नुकसान हो चुका है। चाबा पावर प्रोजेक्ट, चाबा ब्रिज और थली ब्रिज सभी प्रभावित हुए हैं। बढ़ती गाद और कटाव से भविष्य में पीएससी कैंटिलीवर ब्रिज भी जलमग्न होने की आशंका है।

Ekta TSN

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