Delhi,25 July-नई दिल्ली में आयोजित ‘मंथन बैठक’ के दौरान हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की पहल को देशभर के सहकारिता मंत्रियों के बीच विशेष मान्यता मिली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में किए गए प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि हिमाचल का मॉडल देशभर के लिए प्रेरणास्रोत है।
हिमाचल प्राकृतिक खेती में बना देश का अग्रणी राज्य
हिमाचल में अब तक 2.23 लाख से अधिक किसान पूर्ण या आंशिक रूप से रासायनिक-मुक्त खेती अपना चुके हैं। मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि हिमाचल देश का पहला राज्य है, जहां प्राकृतिक खेती की उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारित किया गया है। मक्की का समर्थन मूल्य 30 से बढ़ाकर 40 रुपये प्रति किलो, गेहूं का 60 रुपये प्रति किलो और कच्ची हल्दी का 90 रुपये प्रति किलो तय किया गया है। हल्दी को ‘हिमाचल हल्दी’ ब्रांड के तहत बेचा जाएगा।
राज्य का लक्ष्य 9.61 लाख किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का है। चंबा जिले के पांगी को राज्य का पहला ‘प्राकृतिक खेती उप-मंडल’ घोषित किया गया है, जहां लगभग 2,244 परिवार रासायनिक-मुक्त खेती कर रहे हैं। सरकार वहां 2,920 हेक्टेयर भूमि पर 100 प्रतिशत प्राकृतिक खेती की योजना बना रही है।
10 मंडियों में प्राकृतिक उपज की बिक्री के लिए विशेष स्थान और ढांचा तैयार किया जा रहा है। इस योजना के तहत बीते दो वर्षों में 27.60 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं। हमीरपुर में मसालों के लिए एक स्पाइस पार्क भी स्थापित किया जाएगा।सरकार किसानों को वित्तीय सहायता भी दे रही है, जैसे ड्रम की खरीद पर सब्सिडी, गोशाला निर्माण पर सहायता, देशी गाय की खरीद पर 50% उपदान और परिवहन हेतु प्रोत्साहन राशि।प्राकृतिक खेती को लेकर हिमाचल की यह पहल न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति को भी सशक्त बना रही है।
