चंडीगढ़, 7 मार्च-: पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में शनिवार को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को बड़ी राहत दी है। अदालत ने सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले में आंशिक बदलाव करते हुए उन्हें इस मामले में बरी कर दिया, जबकि अन्य तीन दोषियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा गया है।
हाई कोर्ट ने यह निर्णय सीबीआई अदालत के फैसले के खिलाफ दाखिल की गई अपीलों पर सुनवाई के बाद सुनाया। मामले में कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और किशन लाल को पहले ही दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। अदालत ने इन तीनों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहियों को पर्याप्त मानते हुए उनकी सजा को यथावत रखने का आदेश दिया।
दूसरी ओर, अदालत ने डेरा प्रमुख के खिलाफ पेश किए गए साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण करने के बाद पाया कि अभियोजन पक्ष उनकी आपराधिक साजिश में भूमिका को संदेह से परे साबित नहीं कर पाया। इसी आधार पर अदालत ने उन्हें संदेह का लाभ देते हुए मामले से बरी कर दिया।यह मामला वर्ष 2002 में हुई पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या से जुड़ा है। छत्रपति ने अपने अखबार में डेरा सच्चा सौदा से जुड़े कुछ गंभीर आरोपों को प्रकाशित किया था, जिसके बाद अक्टूबर 2002 में सिरसा में अज्ञात हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी थी। इस हमले में गंभीर रूप से घायल छत्रपति की बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश देखने को मिला था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच बाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई थी। लंबी जांच और सुनवाई के बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने डेरा प्रमुख समेत चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी।इस फैसले को चुनौती देते हुए सभी दोषियों ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। अपीलों पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और सीबीआई की ओर से कई दौर की बहस हुई, जिसमें साक्ष्यों, गवाहों के बयान और घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों पर विस्तार से चर्चा की गई।सभी पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों का विश्लेषण करने के बाद हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि जहां तीन आरोपियों की भूमिका स्पष्ट रूप से साबित होती है, वहीं डेरा प्रमुख के खिलाफ साजिश में शामिल होने के पर्याप्त प्रमाण नहीं पाए गए।इस फैसले के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है और अब इस पर आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर भी नजरें बनी हुई हैं।
