Shimla,21 September-हिमालय साहित्य संस्कृति एवं पर्यावरण मंच ने आज शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में एक कवि गोष्ठी और संवाद का आयोजन किया,जिसमें हिमाचल प्रदेश की पर्यावरणीय समस्याओं और प्राकृतिक आपदाओं पर चर्चा की गई। कार्यक्रम के दौरान मंच ने प्रदेश सरकार,राज्यपाल और हिमाचल उच्च न्यायालय को “हरित हिमाचल, स्वस्थ हिमाचल” के नारे के साथ नौ सूत्रीय सुझाव पत्र सौंपने का निर्णय लिया।
इस सुझाव पत्र में प्रमुख रूप से प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध, वन कटान और अवैज्ञानिक फोर लेन एवं बहुमंजिला भवन निर्माण पर रोक,खनन और विस्फोटक सामग्री पर नियंत्रण, पहाड़ों पर कचरा न फेंकने की व्यवस्था, तथा प्रत्येक स्कूल, कॉलेज और परिवार में “ऋतु मित्र पौधारोपण” योजना लागू करने की मांग शामिल है।कार्यक्रम के अध्यक्षीय मंडल में डॉ. मस्तराम शर्मा, डॉ. विजय लक्ष्मी नेगी, ओम प्रकाश शर्मा, डॉ. सत्यनारायण स्नेही और जगदीश बाली शामिल रहे। मंच के अध्यक्ष एस. आर. हरनोट ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में हिमाचल प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित हुआ है, जिसका मुख्य कारण अवैज्ञानिक विकास कार्य और अनियंत्रित विद्युत परियोजनाओं का निर्माण है। उन्होंने सुझाव दिया कि हिमाचल को “सौर ऊर्जा राज्य” घोषित कर नदियों और नालों के किनारे सरकारी और निजी भवनों को हटाया जाना चाहिए।
मंच संचालन दीपती सारस्वत ने कविताओं के माध्यम से किया। कार्यक्रम में लगभग साठ से अधिक नवोदित और वरिष्ठ रचनाकारों ने पर्यावरण पर आधारित कविताएं प्रस्तुत कीं। उपस्थित रचनाकारों में मस्तराम शर्मा, विजय लक्ष्मी नेगी, ओम प्रकाश शर्मा, सत्यनारायण स्नेही, जगदीश बाली, कुलदीप गर्ग, दिनेश शर्मा, सलिल शमशेरी, स्नेह नेगी, पूजा सूद डोगर, रमेश डढवाल सहित कई पर्यावरण प्रेमी शामिल थे।हरनोट ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए और पर्यटन उद्योग को पूरी तरह से पर्यावरण मित्र बनाकर प्रदूषण फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि हिमाचल में प्रति वर्ष एक करोड़ से अधिक पर्यटक आते हैं, जो भारी मात्रा में प्लास्टिक कचरा छोड़ते हैं।
