मंडी, धर्मवीर ( TSN)– देश इस वक्त 5जी टेक्नोलॉजी के साथ आगे बढ़ रहा है लेकिन हिमाचल प्रदेश का खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग अभी भी बाबा आदम के जमाने की 2जी और 3जी तकनीक वाली मशीनों के सहारे ही चला हुआ है। उचित मूल्यों की दुकानों के माध्यम से उपभोक्ताओं को अनुदानयुक्त जो राशन दिया जाता है वो इन मशीनों की सांसे चलने के बाद ही मिलता है। लेकिन आए दिन इन मशीनों की सांसे फूल जाती हैं जिसके चलते उपभोक्ताओं को राशन लेने के लिए बार-बार चक्कर काटने पड़ते हैं।
रोजाना सर्वर डाउन की समस्या से जूझते हैं उपभोक्ता, बार-बार काटने पड़ते हैं चक्कर
उपभोक्ता गीता देवी, तारा शर्मा, हरिप्रिया और कुसुम ने बताया कि वे जब भी राशन लेने जाती हैं तो अधिकतर समय मशीन की खराबी के कारण राशन नहीं मिल पाता। यही बताया जाता है कि सर्वर डाउन है और मशीन खराब है। ऐसे में कई चक्कर काटने के बाद तब कहीं जाकर राशन मिल पाता है। उपभोक्ताओं ने प्रदेश सरकार से मांग उठाई है कि इन मशीनों को बदलकर आधुनिक मशीनें लगाई जाएं। यदि सरकार ऐसा नहीं कर सकती तो फिर पुरानी पद्दति से ही राशन का वितरण किया जाए, ताकि उपभोक्ताओं को परेशानी न झेलनी पड़े।
विभाग का कहना- समस्या आते ही तुरंत प्रभाव से किया जाता है उसका समाधान
मंडी जिला की बात करें तो यहां 842 उचित मूल्यों की दुकानें हैं। 815 दुकानों पर 2जी और 3जी तकनीक की मशीने हैं जबकि मात्र 27 दुकानों पर हालही में 4जी तकनीक की मशीनें उपलब्ध करवाई गई हैं। खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग के जिला नियंत्रक विजय हमलाल ने माना कि मशीनों में आए दिन खराबी आती रहती है लेकिन इसके समाधान के लिए हर जिला और प्रदेश स्तर पर व्हट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं। जैसे ही कहीं पर कोई समस्या आती है तो उसका तुरंत प्रभाव से समाधान कर दिया जाता है। अधिकारी के अनुसार ज्यादा दिक्कत आधार सर्वर से होती है क्योंकि वहां ट्रेफिक ज्यादा होने के कारण यह समस्या अधिक पेश आती है। उन्होंने बताया कि विभाग समय-समय पर तकनीक में बदलाव करता रहता है।
गौर रहे कि हिमाचल प्रदेश के आज गांव-गांव तक 4जी तकनीक पहुंच चुकी है और 5जी तकनीक को पहुंचाने का कार्य भी तेज गति के साथ चला हुआ है। 5जी और 2जी की स्पीड में अंतर समझाना सूरज को रोशनी दिखाने जैसा होगा। 5जी तकनीक वाली मशीन जिस तेज गति के साथ काम करेगी वैसी उम्मीद 2जी या 3जी से नहीं की जा सकती। इस बात को सरकार को समझना होगा और उपभोक्ताओं की सुविधाओं के लिए नई तकनीक को अपनाना होगा।
