करनाल /राकेश कुमार शर्मा -:हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण ने बुधवार को करनाल के गांव कुंडा कलां में यमुना नदी के तटबंधों और बाढ़ बचाव कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचकर संभावित बाढ़ को लेकर किए जा रहे इंतजामों की समीक्षा की और कार्यों को तय समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने कहा कि बदलते मौसम और यमुना के बदलते बहाव को देखते हुए पहले से अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।
मीडिया से बातचीत में हरविंदर कल्याण ने कहा कि मौसम में तेजी से हो रहे बदलावों का असर हर क्षेत्र पर पड़ रहा है। ऐसे में प्रशासन को समय रहते मजबूत तैयारियां करनी होंगी ताकि बाढ़ और कटाव से लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने बताया कि जहां नए स्टड बनाने या पुराने कार्यों की मरम्मत की जरूरत होती है, वहां योजनाएं तैयार कर सरकार को भेजी जाती हैं।उन्होंने जानकारी दी कि यमुना क्षेत्र में करीब 35 करोड़ रुपये की लागत से बाढ़ बचाव कार्य चल रहे हैं, जबकि घरौंडा विधानसभा क्षेत्र के छह स्थानों पर लगभग 25 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट जारी हैं। अधिकांश कार्य 30 मई तक पूरे हो जाएंगे, जबकि बाकी काम 15 जून तक समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।बाढ़ प्रबंधों का निरीक्षण करने के बाद विधानसभा अध्यक्ष करनाल के सेक्टर-33 स्थित सामुदायिक केंद्र पहुंचे, जहां स्लम एरिया के बच्चों और परिवारों के लिए विशेष पुनर्वास एवं कल्याण शिविर आयोजित किया गया। उन्होंने बच्चों से बातचीत कर उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी योजनाओं से जोड़ने के प्रयासों की सराहना की।
हरविंदर कल्याण ने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुविधाएं पहुंचाना ही असली अंत्योदय है। उन्होंने कहा कि कई जरूरतमंद परिवार आज भी जरूरी दस्तावेजों और सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। ऐसे शिविरों के माध्यम से उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।उन्होंने बच्चों की शिक्षा पर विशेष जोर देते हुए कहा कि कोई भी बच्चा स्कूल से दूर नहीं रहना चाहिए। वहीं नशामुक्ति अभियान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन जरूरतमंद लोगों को नशे से बाहर निकालकर सामान्य जीवन से जोड़ने का प्रयास कर रहा है।
राजकीय स्कूल के प्रधानाचार्य मनोज कुमार ने बताया कि जिन बच्चों के पास आधार कार्ड या अन्य जरूरी दस्तावेज नहीं हैं, उनके लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है ताकि उनका स्कूल में दाखिला न रुके। शिविर के माध्यम से बच्चों को नजदीकी स्कूलों में प्रवेश दिलाया जा रहा है।
