हमीरपुर -:मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा बिट्टू ने पंचायत चुनावों को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पंचायत चुनावों को सत्ता का “सेमीफाइनल” बताना पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि ये चुनाव गांवों में विकास, सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे को मजबूत करने के लिए होते हैं, न कि राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के लिए। पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ऐसे चुनावों को भी राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रही है, जबकि पंचायत चुनाव पार्टी चिन्ह के आधार पर नहीं लड़े जाते।
सुनील शर्मा ने कहा कि पूर्व में केंद्र की कांग्रेस सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मनरेगा योजना शुरू की थी।लेकिन मौजूदा केंद्र सरकार ने योजना के स्वरूप और कार्यप्रणाली में कई बदलाव किए हैं, जिससे गांवों के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ग्रामीण विकास योजनाओं पर भी दिल्ली से नियंत्रण रखना चाहती है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था और पंचायतों की स्वायत्तता के खिलाफ है।उन्होंने उम्मीद जताई कि पंचायत चुनाव में जीतकर आने वाले प्रतिनिधि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर गांवों के विकास को प्राथमिकता देंगे और लोगों की मूलभूत समस्याओं के समाधान के लिए कार्य करेंगे।पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के मुद्दे पर भी सुनील शर्मा ने केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि जब भारत को रूस से कम कीमत पर कच्चा तेल उपलब्ध हो रहा है, तो फिर महंगे दामों पर दूसरे देशों से तेल खरीदने की क्या आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है और लगातार बढ़ती महंगाई से गरीब तथा मध्यम वर्ग सबसे ज्यादा परेशान है।उन्होंने कहा कि ईंधन की कीमतों में वृद्धि से रोजमर्रा की वस्तुएं भी महंगी हो रही हैं, जिससे लोगों का घरेलू बजट बिगड़ रहा है। कांग्रेस पार्टी इस बढ़ती महंगाई और ईंधन मूल्य वृद्धि का विरोध करती है। उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की कि पेट्रोल और डीजल के दाम कम कर जनता को राहत दी जाए।
