शिमला, 30 अक्टूबर ( TSN)-इस बार दीपावली पर्व की तिथि को लेकर लोगों में असमंजस बना हुआ है. लोग इस उलझन में है कि इस बार दीपावली 31 अक्टूबर को मनाई जानी चाहिए या 01 नवंबर को मनाना चाहिए।इस बारे में जानकारों ने दीपावली पर्व को लेकर दोनों दिनों यानी 31 अक्टूबर और 01 नवंबर को मनाने के लिए ये जानकारी दी है.
दीवाली 31 अक्टूबर या 01 नवंबर को मनाई जाए
साल का सबसे बड़ा पर्व दीवाली मनाने के लिए लोग जोरों शोरो से तैयारी में जुटे हैं. हालांकि इस बार लोग इस बात को लेकर भी उलझन में हैं कि इस बार दीवाली 31 अक्टूबर या 01 नवंबर को मनाई जा रही है. इस बारे में पंडित किशोरी लाल का कहना है कि 31 अक्टूबर के दिन दोपहर बाद 03.53 तक चतुर्दशी तिथि है उसके बाद अमावस्या लग जाएगी, सूर्य अस्त शाम 05.36 पर है, कार्तिक अमावस्या को गोधूलि बेला, स्थिर लग्न में, मध्य रात्रि निशार्ध में स्थिर लग्न में दीपदान व महालक्ष्मी पूजन उत्तम माना गया है । वृष स्थिर लग्न शाम 06.24 से 08.19 तक है,तो इस स्थिर लग्न है, इसी में दीपदान व दीपावली पूजन उत्तम रहेगा। उसके बाद मध्य रात्रि में स्थिर सिंह लग जाएगी.जबकि 01 नवंबर को सुबह सूर्य उदय से ही अमावस्या है, शाम को 05.35 पर सूर्य अस्त होगा, अमावस्या शाम को 06.16 पर समाप्त होगी, उसके बाद शुक्ल पक्ष प्रतिपदा शुरू हो जाएगी।पंडित किशोरी लाल ने बताया कि शास्त्रों में नंदा तिथि को होलिका दहन और दीपावली दीप दान की मनाही है, प्रतिपदा तिथि नंदा तिथि है. दीपोत्सव के समय यदि प्रतिपदा तिथि दिख जाए तो उसे रजस्वला की तरह दूषित मानते हुए त्याग देना चाहिए। निशा काल में श्रीलक्ष्मी पूजन किया जाता है, उस समय भी प्रीतिपदा तिथि होगी, अब दीपावली पूजन के लिए स्थिर लग्न वृष शाम 06.20 से 08.15 बजे तक है।उसके बाद स्थिर सिंह लग्न मध्य रात्रि 00.54 से 03.12 तक है। इस तरह से वृष लग्न में चार मिनट पहले ही अमावस्या खत्म और टूटती तिथि में पूजन शुभ नहीं होता तो पूजन समय क्या ..? अतः पूजन नहीं किया जा सकेगा। ऐसे में 31 अक्टूबर को दीपावली पर्व मनाना उत्तम है.
