Shimla, 31 January-:भारत सरकार द्वारा प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने देश की आर्थिक मजबूती, विकास दर और वैश्विक प्रतिष्ठा को उजागर किया है। भाजपा सांसद एवं प्रदेश महामंत्री डॉ. सिकंदर कुमार ने सर्वेक्षण की सराहना करते हुए इसे भारत की संरचनात्मक स्थिरता और विकास के प्रमाण के रूप में देखा।
डॉ. कुमार ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है और अगले वर्ष 2026-27 में यह 6.8–7.2 प्रतिशत के बीच बनी रहने की संभावना है। उन्होंने बताया कि निजी उपभोग में 7 प्रतिशत और निवेश में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि ने घरेलू मांग और निवेश दोनों को मजबूत किया है।सर्वेक्षण में उपभोक्ता मुद्रास्फीति केवल 1.7 प्रतिशत रहने का संकेत दिया गया, जो पिछले वर्षों में सबसे निचले स्तरों में से एक है। वित्तीय अनुशासन के चलते राजकोषीय घाटा 4.4 प्रतिशत तक सीमित रहने का अनुमान है और जीएसटी संग्रह अप्रैल–दिसंबर 2025 में 17.4 लाख करोड़ रुपये रहा।बैंकिंग क्षेत्र भी मजबूत स्थिति में है। सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां 2.2 प्रतिशत और शुद्ध एनपीए 0.5 प्रतिशत पर आ गई हैं। बैंक ऋण वृद्धि 14.5 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जिससे उद्योग, व्यापार और आम नागरिकों को आर्थिक गतिविधियों में मदद मिल रही है।
डॉ. कुमार ने कहा कि सेवा क्षेत्र अब भारत की अर्थव्यवस्था का प्रमुख इंजन बन गया है, जिसका योगदान सकल मूल्य वर्धन में 56.4 प्रतिशत तक पहुंच गया है। औद्योगिक क्षेत्र में भी वृद्धि दर 9.13 प्रतिशत रही, जबकि कृषि क्षेत्र में बागवानी उत्पादन पहली बार खाद्यान्न उत्पादन से अधिक हुआ। महिला श्रम भागीदारी दर 41.7 प्रतिशत तक बढ़ी और बेरोजगारी दर घटकर 4.8 प्रतिशत रही।बुनियादी ढांचे और स्वच्छ ऊर्जा में भी उल्लेखनीय विकास हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में 60 प्रतिशत वृद्धि हुई, एयरपोर्ट 164 तक पहुंचे और अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत हो गई।डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि सर्वेक्षण साबित करता है कि भारत ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है, और आने वाली चुनौती इसे और अधिक समावेशी, टिकाऊ और समान बनाने की है।
