कुरुक्षेत्र(TSN): शनिवार को साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगने जा रहा हैं। इस ग्रहण को लेकर वैज्ञानिक दृष्टि से ओर ज्योतिष विद्वानों के अनुसार अपनी अपनी राय हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से पैनोरमा एवं विज्ञान केन्द्र के परियोजना समन्वयक एवं प्रमुख सुरेश सोनी ने अपने तरीके से चंद्र ग्रहण लगने के कारणों एवं प्रभाव के बारे से विस्तार से बताया तो वहीं ज्योतिष की दृष्टि से गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र प्रमुख डॉ. रामराज कौशिक ने ज्योतिष के हिसाब से इस चंद्र ग्रहण के राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रभावों के बारे में बताया।
वैज्ञानिकों के अनुसार विज्ञान कहता है कि चंद्र ग्रहण महज एक खगोलीय घटना हैं। विज्ञान के अनुसार चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती हैं। इस दौरान पृथ्वी की छाया चंद्रमा की रोशनी को ढक लेती हैं दूसरी ओर, सूर्य की रोशनी पृथ्वी के वायुमंडल से टकराकर चंद्रमा पर पड़ती हैं। इससे चंद्रमा चमकीला हो जाता हैं।
इस साल का आखिरी चंद्र ग्रहण 28 एवं 29 अक्टूबर की मध्यरात्रि को लगने जा रहा हैं,हालांकि चंद्र ग्रहण एक भौगोलिक घटना है, लेकिन ज्योतिष शास्त्र में इसे शुभ नहीं माना जाता हैं। पौराणिक मान्यता है कि पूर्णिमा की रात जब राहु और केतु चंद्रमा को निगलने का प्रयास करते हैं तो चंद्रमा पर ग्रहण लग जाता हैं। वहीं चंद्र ग्रहण से कुछ घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता हैं। ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से भी सूतक काल को अच्छा समय नहीं माना जाता हैं। शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण रहता हैं,ऐसे में इस दिन ग्रहण लगना बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला हैं।
इस साल का अंतिम चंद्रग्रहण मेष राशि में लगने जा रहा हैं। ग्रहण का असर सभी राशियों पर दिखाई देने वाला हैं। धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण जब लगता है तो इसका प्रभाव सभी लोगों के ऊपर रहता हैं। चंद्रग्रहण सिर्फ और सिर्फ वैज्ञानिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। साल का अंतिम चंद्रग्रहण शरद पूर्णिमा (Sharad purnima) के दिन लगने जा रहा हैं।
