आंध्र प्रदेश (एकता): आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में तिरुमला पर्वत पर स्थित तिरुपति बालाजी का प्रसिद्ध मंदिर है। इस मंदिर के दर्शन से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सूत्रों के मुताबिक सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर में पूजा अर्चना कर देशवासियों के लिए अच्छी सेहत और समृद्धि की कामना भी की। बता दें कि उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही हैं।

बता दें कि वह 26 नवंबर की शाम तिरुपति पहुंचें, जहां वह रात रुके और फिर अगले दिन 27 नवंबर की सुबह भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन किए। उन्होंने काफी समय तक मंदिर में समय बिताया। इसके बाद वह तेलंगाना के लिए रवाना हो गए। तिरुपति बालाजी मंदिर भारत के सबसे अमीर और सबसे मशहूर मंदिरों में से एक है। यह मंदिर भगवान विष्णु के अवतार श्री वेंकटेश्वर स्वामी को समर्पित है। गौरतलह है कि उन्होंने मथुरा के वृन्दावन स्थित बांकेबिहारी मंदिर में भी पूजा और दर्शन किए थे।

तिरुपति बालाजी में क्या खासियत है?
इस मंदिर की कई खासियतें हैं। यह मंदिर भगवान वैंकटेश्वर की पत्नी श्री पद्मावती को समर्पित है। कहा जाता है कि तिरुमला की यात्रा तब पूरी नहीं हो सकती, जब तक इस मंदिर के दर्शन नहीं किए जाते। तिरुमला में सुबह 10.30 बजे से दोपहर 12 बजे तक कल्याणोत्सव मनाया जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के मुताबिक, यहां आकर तिरुपति मंदिर में अपने बाल दान करते हैं। इस अलौकिक और चमत्कारिक मंदिर से कई रहस्य जुड़े हुए हैं। वेंकटेश्वर स्वामी यानी बालाजी की मूर्ति का पिछला हिस्सा हमेशा नम रहता है। यदि कान लगाकर ध्यान से सुनें तो सागर की लहरों की आवाज सुनाई देती है। वेंकेटेश्वर स्वामी मंदिर में एक दीया हमेशा जलता रहता है और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस दीपक में कभी भी तेल या घी नहीं डाला जाता।

तिरुपति बालाजी मंदिर में कितनी सीढ़ी है?
तिरुमला पर्वत पर स्थित तिरुपति बालाजी के मंदिर की करीर 3500 सीढ़ियां हैं। यहां दर्शन करने में 2 दिन लगते हैं। श्रद्धालुओं की इस मंदिर के प्रति गहरी आस्था है। हर साल लाखों सैलानी यहां दर्शनों के लिए पहुंचते हैं।
