केंद्रीय मृदा एवं लवणता अनुसंधान परिषद के 56वें स्थापना दिवस पर पहुंचे संस्थान के पूर्व निदेशक एवं कृषि वैज्ञानिक भर्ती बोर्ड नई दिल्ली के पूर्व सदस्य डॉ. एनके त्यागी ने वैज्ञानिकों को कई महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन कृषि क्षेत्र के लिए बड़ा खतरा है इसलिए हमें ऐसी खेती की बढ़ना होगा जिसमे ऊर्जा कम खर्च हो और। ग्रीन हाउसेस गैसों का उत्सर्जन कम हो। प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करके हमें उनका जरूरत के हिसाब से उपयोग करना होगा।
डॉ. एनके त्यागी ने कहा कि भारत कृषि आधारित देश है, जलवायु परिवर्तन का सर्वाधिक असर कृषि सेक्टर पर देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि कार्बनडाई ऑक्साइड गैस की बाउंड्री 350 होनी चाहिए, लेकिन आज के समय में 417.06 पीपीपी है। नाइट्रोजन 35.0 पीपीपी के दायरे से निकलकर 121 पीपीपी तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि लैंड गैप के साथ-साथ फूड गैप की स्थिति बनती का रही है ।
डॉ. एनके त्यागी ने वैज्ञानिकों को एक नई एग्रो तकनीक की जानकारी दी। उन्होंने 3डी सी फार्मिंग को नए शोध विषय के रूप में वैज्ञानिकों के सामने रखा। उन्होंने कहा कि ये फार्मिंग समुद्र तटीय क्षेत्रों में एक बेहतर और बड़ा विकल्प हो सकती है।
डॉ. एनके त्यागी ने बताया कि इसके लिए समुद्र में एक गहराई तक ढांचा तैयार किया जाता है। जिसमें अलग-अलग गहराई में अलग-अलग तापमान होता है, जिसमें अलग-अलग तरह के जीव जीवित रहते हैं, उन्हें उन्हीं की गहराई मेंं रहकर पालना होगा, उससे बेहतर आय हो सकती है। इसमें मछलियों के साथ-साथ अन्य समुद्री जीवों का पालन हो सकता है। इसकी तकनीक विकसित हो गई है, कोरिया, नीदरलैंड आदि कई देशों में इस पर कार्य शुरू हो चुका है, भारत में भी केंद्रीय मछली अनुसंधान संस्थान कोचीन के क्षेत्रीय केंद्र मंडपम (तमिलनाडु) में इस पर शोध शुरू कर दिया है। भविष्य में 3डी सी फार्मिंग आय का बड़ा क्षेत्र हो सकता है।

