दिल्ली/हरियाणा (एकता): आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) और राज्यसभा सांसद डॉ. संदीप पाठक ने शुक्रवार को कई मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर नि+शाना साधा। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पहलवान और ओलंपिक में पदक विजेता साक्षी मलिक के संन्यास की लेकर सरकार पर कड़ा प्रहार किया। जानकारी के मुताबिक संदीप पाठक ने कहा कि बीजेपी सरकार ने हमेशा ही बहन बेटियों और महिलाओं के अप#मान करने वालों को पदों से सुशोभित किया है। देश का नाम रोशन करने वाली ओलंपिक में मेडल लाने वाली पहलवान बेटियों को पहले न्याय के लिए जंतर-मंतर पर बैठना पड़ा। इसके बाद अब कोई उम्मीद नजर नहीं आने पर ओलंपियन मेडलिस्ट साक्षी मलिक ने कुश्ती से ही संन्यास की घोषणा करनी पड़ी। जनता सबकुछ देख रही है।
“आप” संगठन महामंत्री और राज्यसभा सांसद डॉक्टर संदीप पाठक ने कहा कि पूरी दुनिया में भारत को प्रजातंत्र के लिए जाना जाता है। भारत का प्रजातंत्र सबसे पुराना, निष्पक्ष और मजबूत है। अगर एक चुने हुए सांसद को सदन में खड़े होकर सवाल पूछने की ही आजादी नहीं है तो फिर उसका सांसद होने का फायदा ही क्या है? आप सोच कर देखिए कि जब एक चुने हुए सांसद को ही नहीं बोलने दिया जा रहा है तो फिर देश के आम लोगों की हालत क्या होगी? सांसदों का सिर्फ इतना कसूर है कि वह संसद की सुरक्षा में चूक को लेकर मोदी सरकार से सवाल पूछ रहे थे। उस सांसद पर कार्रवाई करने के बजाय मोदी सरकार विपक्ष के सांसदों को निलंबित कर रही है।
डॉ. संदीप पाठक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का दायित्व बनता था कि वह सदन में आकर जवाब देते। संसद में जवाब देने की बजाय मोदी सरकार लगातार सांसदों को निलं+बित करती जा रही है। जो भी व्यक्ति राजनैतिक रूप से भाजपा के सामने खड़ा होता है, उसको यह ईडी और सीबीआई के द्वारा गिर#फ्तार कर लेते हैं। देश के प्रमुख मुद्दे महंगाई, बेरोजगारी और भ्र@ष्टाचार को लेकर सभी विपक्षी नेता एक साथ हैं। सभी दल एक साथ मिलकर नरेंद्र मोदी जी और भाजपा की सरकार को हटाएंगे।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा व सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा से साक्षी मलिक ने की मुलाकात
आज साक्षी मलिक और उनके पति सत्यव्रत कादयान ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा व सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा से मुलाकात की। वे अपने साथ हुई वादा+खिलाफी से बेहद आहत थे। हुड्डा ने उनसे आग्रह किया देशहित में कुश्ती से संन्यास के अपने फैसले पर पुनर्विचार करें और उन्हें विश्वास दिलाया कि न्याय मिलने तक उनका साथ नहीं छोड़ेंगे।

