कुल्लू : मनमिन्दर अरोड़ा- ( TSN)- भारत की कठिनतम यात्रा में से एक श्रीखंड महादेव यात्रा इस बार पिछली साल की अपेक्षा बेहद कठिन है। श्रीखंड महादेव के रास्ते में बर्फ अभी तक पिघली नहीं है और पार्वती बाग के आगे लगातार ग्लेशियर ही ग्लेशियर है। ऐसे में रास्तों की जांच करने के लिए श्रीखंड गई प्रशासन की टीम अब वापिस लौट आई है।
टीम के सदस्यों ने बताया कि इस बार पिछले साल की अपेक्षा यात्रा कठिन है। इसमें पार्वती बाग तक रास्ते ठीक है। इससे आगे रास्ते खराब है कई जगह पर रास्ते का नामोनिशान नहीं है। इसमें कुंशा, नैन सरोवर, भीम तलाई के पास पूरा रास्ता क्षतिग्रस्त हुआ है। इसके अलावा हर बार की तरह इसमें दो रास्ते हैं एक रास्ता सीधे खड़े ग्लेशियर में चढ़ाई चढ़कर जाना होता है। जो बेहद खतरनाक है यहां पर हल्का सा पांव फिसला तो जान चली जा सकती है। दूसरा रास्ते थोडा दूर है लेकिन उसमें भी हिमपात अधिक है। 35 किलोमीटर की पैदल श्रीखंड महादेव यात्रा कर पाना आसान नहीं है। इसमें कई जगहों पर पगडंडियों को पार कर महादेव के दर्शन करने होते हैं। आठ सदस्यों की टीम प्रशासन को अब अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इसमें बताया जाएगा कि रास्ते में कहां कहां रास्ता बनाने की आवश्यकता है। इसके अलावा ग्लेशियरों में रास्ता तैयार करना होगा। तभी यात्रा सुगम हो सकती है।
ऑक्सीजन की रहती है कमी
18570 फीट की उंचाई पर स्थित श्रीखंड महादेव तक पहुंचने के लिए रास्ते में कई जगहों पर जंगली जड़ी बूटियां पाई जाती है। इस कारण यहां पर ऑक्सीजन की कमी भी होती है। यात्रा के दौरान नशीले पदार्थ को ले जाने पर पूर्ण रोक से मनाही है। इसके बावजूद भी यात्रा पर जाने के लिए कुछ लोग नशीले पदार्थ को साथ ले जाते हैं।
ऐसे पहुंचा जा सकता है श्रीखंड
श्रीखंड महादेव पहुंचने के लिए कुल्लू जिला के निरमंड होकर बागीपुल और जाओं तक छोटे वाहनों और बसों में पहुंचा जा सकता है। जहां से आगे करीब 35 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करनी होती है। शिमला से रामपुर- 130 किलोमीटर, रामपुर से निरमंड-17 किलोमीटर, निरमंड से बागीपुल 17 किलोमीटर, बागीपुल से जाओ करीब 12 किलोमीटर दूर है।
श्रीखंड महादेव यात्रा शुरू होने से पहले ही नियमों को श्रद्धालु ठेंगा दिखा रहे हैं। प्रशासनिक तौर पर यात्रा करने से पहले ही श्रद्धालु श्रीखंड महादेव की यात्रा कर रहे हैं। मार्ग में भारी हिमपात के कारण जगह-जगह ग्लेशियर जमे हैं। जिस कारण यात्रा करना जोखिम भरा बना हुआ है। हालांकि जिला प्रशासन की ओर से करवाई जाने वाली श्रीखंड महादेव की यात्रा आधिकारिक रूप से अभी तक तिथि भी निर्धारित नहीं की गई है। इसके बावजूद भी चोरी छिपे यात्रा कर रहे हैं। श्रीखंड महादेव में रास्तों और ग्लेशियरों की जांच के लिए भेजी टीम को कई लोग यात्रा पर मिले हैं। कुछ लोगों को उन्होंने वापिस लौटाया जबकि कुछ लोग यात्रा कर रहे हैं। इसमें अन्य राज्य से आए हुए एक श्रद्धालु का पांव भी फिसल गया था। जिसके बाद साथ में आए लोगों ने युवक को बचा लिया।
वर्ष 2023 में भी राजस्थान के श्रद्धालु की नैन सरोवर के पास हिमपात में पांव फिसलने से उसकी मौत हो गई। वर्ष 2011 से अब तक श्रीखंड यात्रा पर 41 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। हर साल इस यात्रा में कई लोगों की जान जाती जाती है। इसके बावजूद भी लोग जान जोखिम में डालकर यात्रा करते हैं। हर वर्ष प्रशासन की देखरेख में श्रीखंड यात्रा ट्रस्ट की ओर से जुलाई महीने में श्रीखंड महादेव की यात्रा का संचालन किया जाता है। इस यात्रा में प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। श्रद्धालु 35 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई चढ़कर 18,570 फीट ऊंचाई पर स्थित शिवलिंग के दर्शन करते हैं।
इस वर्ष श्रीखंड की यात्रा को लेकर 19 जून को
उपायुक्त कुल्लू की ओर से प्रस्तावित पहली बैठक होनी है। इसके लिए इस बार 14 से 28 जुलाई तक श्रीखंड महादेव की यात्रा करने का विचार है। ऐसे में 19 जून को यात्रा को लेकर कई अहम निर्णय लिए जाएंगे। यात्रा के लिए जाने वाले रास्तों की स्थित पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद यात्रा करवाने का प्रशासन निर्णय लेगा। गौरतलब है कि श्रीखंड महादेव की यात्रा को लेकर 19 जून को बैठक रखी है। अगर बिना अनुमति के यात्रा पर जा रहे हैं तो इसके उपर कार्रवाई के आदेश जारी किए जाएंगे।श्रीखंड महादेव यात्रा पर गई प्रशासन के आठ सदस्यों की टीम के द्वारा रिपोर्ट तैयार की गई है। इसके बाद रिपोर्ट उपायुक्त कुल्लू को भेजी जाएगी। रास्ते की मरम्मत कर यात्रा को सुगम बनाने का प्रयास किया जाएगा
जिला परिषद कुल्लू के अध्यक्ष पंकज ने बताया कि वह भी प्रशासन के द्वारा गठित टीम के साथ श्रीखंड महादेव के रास्तों का निरीक्षण करने के लिए निकले थे। ऐसे में उन्होंने देखा की जगह-जगह पर बाहरी राज्यों से श्रद्धालु बिना अनुमति के श्रीखंड महादेव की यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से भी आग्रह किया गया है कि वह बिना अनुमति के श्रीखंड महादेव की यात्रा न करें। क्योंकि यहां का रास्ता काफी खतरनाक है और कभी भी कोई दुर्घ*टना पेश आ सकती है।
